दरअसल, भारत और पाकिस्तान 1 जनवरी 1992 से लगातार हर वर्ष के पहले दिन कूटनीतिक माध्यमों से अपने जेलों में बंद कैदियों की सूची और परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में जानकारी देता रहा है। जो इस साल भी जारी रहा।
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