भारतीय, जिसकी थिअरी के कायल हुए आइंस्टाइन
हम पानी पीते हैं। पानी का तापमान काफी कम हो जाता है तो एक निश्चित सीमा के बाद यह बर्फ बन जाता है और गर्म करने पर या तापमान ज्यादा होने पर एक निश्चित सीमा के बाद भाप बनकर उड़ने लगता है। इस तरह हम जानते हैं कि पानी तीन रूप में पाया जाता है। वह तीन रूप हैं एक तो पानी जो हम पीते हैं। इसको द्रव्य रूप कहा जाता है और इंग्लिश में Liquid। दूसरा रूप है बर्फ और तीसरा भाप। साइंस की भाषा में इन तीनों रूपों को ठोस, द्रव्य और गैस कहा जाता है। वैसे आमतौर पर तो किसी भी चीज के ये तीन रूप होते हैं लेकिन कुछ चीज एक और रूप में पाया जाता है। उस रूप के Bose-Einstein Condensate के नाम से जाना जाता है। फिलहाल तो हम Bose-Einstein Condensate के जनक भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के बारे में बताने जा रहे हैं। रही Bose-Einstein Condensate की बात तो इसको अच्छे से समझाते हुए हम एक आर्टिकल आपके लिए तैयार करेंगे। आइए आज हम उस महान वैज्ञानिक के बारे में जानते हैं जिनकी थिअरी के आइंस्टाइन भी मुरीद हो गए थे।
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