मौजूदा सिस्टम में संयुक्त सचिवों और चारों सचिवों पर काम का बहुत बड़ा बोझ हुआ करता था जिससे मंत्रालय देश की विदेश नीति के मोर्चे पर ही उलझा रहता था और उसके पास रणनीतिक योजनाएं बनाने और मांग के मुताबिक बड़े कदम उठाने आदि का मौका नहीं होता था। अब नए सिस्टम में इन कठिनाइयों को दूर करते हुए वक्त की मांगों को पूरा किया जाएगा।
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