यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और न्यायालय ने 3 दिसंबर, 2012 को जैन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रुश्दी परिवार को निर्देश दिया था कि वह आदेश की तिथि पर बाजार मूल्य के हिसाब से जैन को मकान सौंपे। हालांकि न्यायालय ने संपत्ति का बाजार मूल्य तय करने का फैसला दिल्ली हाई कोर्ट पर छोड़ दिया था।
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