महात्मा गांधी 1942 में गौरीगंज पहुंचे तो उन्हें लोगों ने चंदे की थैली दी जिसमें 100 की जगह सिर्फ 99 रुपये थे। इसकी शिकायत जब महात्मा गांधी ने की तो खजांची रामचरित सेठ ने एक रुपये मिलाकर इस रकम को पूरा किया।
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