यशस्वी को ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा देनी थी, जो 14 और 15 अक्टूबर को थी, लेकिन संयोग कुछ ऐसे बने कि फिलहाल चल रहे विजय हजारे ट्रोफी और 10वीं की परीक्षा की तारीखों में टकराव हो गया। ऐसे में उन्होंने परीक्षा छोड़ने का फैसला किया और डबल सेंचुरी लगाकर इतिहास रच दिया।
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