क्षमा दिवस: दिल मिला देती है छोटी सी 'सॉरी'
जैन परंपरा में दशलक्षण पर्व की समाप्ति से एक दिन पहले क्षमा दिवस मनाया जाता है। इस दिन सभी अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना करते हैं। कहते हैं कि जहां दया तहं धर्म है, जहां लोभ तहं पाप। जहां क्रोध तहं काल है, जहां क्षमा आप। यानि कि जिस स्थान पर दया का वास होता है वहां पर ही धर्म का स्थान होता है, और जहां लालच होता है वहां पाप भी होता है। जहां क्रोध होता है वहां काल अर्थात अंत होता है और जहां क्षमा का स्थान होता है वहां आपका अर्थात ईश्वर का निवास होता है। तो अगर आपको भी अपने द्वारा हुई गलतियों के लिए अपनों से या अपने आस-पास के लोगों से क्षमा मांगनी है तो आप भी क्षमा दिवस के दिन महान व्यक्तियों द्वारा कहे गए इन कोट्स के जरिए क्षमा मांग सकते हैं।
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